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Chairman Message

अध्यक्षीय उद्बोधन

प्रिय सदस्यगण

छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्या. की तृतीय वार्षिक साधारण सभा में, दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से पधारे आप सभी अध्यक्षो का हार्दिक स्वागत है।

                आज हम सब फिर से अपने दुग्ध महासंघ के उत्तरोत्तर विकास हेतु नीतिगत निर्णय एवं आने वाले वर्ष 2015-16 का बजट एवं कार्ययोजना के निर्धारण हेतु एकत्र हुए है। आप सबकी एकजुटता, दुग्ध समिति एवं दुग्ध महासंघ के प्रति विश्वास एवं सर्मपण की भावना के कारण, हमारा दुग्ध महासंघ नित नवीन उंचाईयो को छूता जा रहा है। दुग्ध संकलन एवं दुग्ध की गुणवत्ता में अपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया गया है। दुग्ध संकलन 62500 लीटर प्रतिदिन एवं 4.3 प्रतिशत फैट व 8.58 प्रतिशत एस.एन.एफ. का औसत दूध, महासंघ को प्राप्त हो रहा है, जिसमें सबसे सराहनीय भूमिका आपकी है, इसकी बदौलत हम संकलन व गुणवत्ता के नये शिखर तक पहुंचने में कामयाब हुए है। अभी इसमें और सुधार की आवश्यकता है दूध की गुणवत्ता में वृद्धि होने से न केवल हमारी मार्केटिंग में वृद्धि हुई है बल्कि हम राज्य में दूध की मार्केटिंग कर रहे अन्य ब्राण्डो के दूध से प्रतिस्पर्धा में कुछ हद तक कामयाब रहे है।

                मुझें यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ की प्रगति का जो सिलसिला प्रारंभ हुआ है उसमें क्षेत्र विस्तार करते हुए छत्तीसगढ़ के 15 जिलो में 627 कार्यशील दुग्ध समितियों के 16000 से अधिक दूध उत्पादकों के साथ हमारा जुड़ाव है। कोरबा से पखांजूर तथा राजनांदगांव से जांजगीर-चांपा तक हमारा क्षेत्र विस्तार हुआ है भविष्य में नये जिलो में क्षेत्र विस्तार का सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।

                दुग्ध समितियांे के विस्तार के साथ-साथ 21 बल्क मिल्क कूलर केन्द्र, जिसमें टप्पासेवईया, कसहीबहरा, छिलपावन, नरतोरा, कौहाकुड़ा, खुटेरी, चिखलाकसा, दल्लीराजहरा, सहदेवनगर, मजरकट्टा, रावण, अमेरा, रोहांसी, सिमगा, तामासिवनी व कोसरंगी में स्थापित किये गये है एवं भविष्य में लेन्ध्रा, गोबरसिंघा, बरपाली, भाठागांव, खैरागढ़ आदि स्थानो में बी.एम.सी. केन्द्र लगाया जाकर, दुग्ध शीत केन्द्र श्रृंखला में भी विस्तार किया जा रहा है जिससे दूध की गुणवत्ता का स्तर बेहतर बनाने में सहयोग मिला है वही परिवहन एवं संसाधन लागत में भी कमी आ रही है।

                आप सबके सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के पुराने जीर्ण-शीर्ण उपकरणों एवं संयंत्र में अच्छे क्वालिटी का उपकरण लगाकर महासंघ की अधोसंरचना को मजबूत किया गया है एवं निरंतर आधुनिकीकरण की प्रक्रिया हेतु कार्यवाही की जा रही है। दुग्ध संयंत्र में होमोनाईजर, दही इन्क्यूबेटर, घी व फ्लेवर्ड मिल्क पैकेजिंग एवं कप फिलिंग मशीन लगाकर नवीनीकरण करते हुए कार्य क्षमता बढ़ाई गई है। बिलासपुर एवं रायगढ़ शीत केन्द्र को पूर्ण संयंत्र के रूप में बदल दिया है एवं भविष्य में बसना दुग्ध शीत केन्द्र में भी पैंकिंग यूनिट लगाकर पूर्ण संयंत्र के रूप में विकसित करने एवं धमतरी शीत केन्द्र में आई.एम.सी. यूनिट लगाकर सुदृढ़ीकरण करने की योजना है।

                नेशनल प्रोग्राम फार डेयरी डेव्हलपमेंट (एन.पी.डी.डी.) योजनान्तर्गत दुग्ध महासंघ के विकास कार्य को गति देने हेतु जिला जांजगीर-चांपा, कांकेर, बेमेतरा व बालोद में बी.एम.सी. केन्द्र लगाने एवं अधोसंरचना विकास हेतु कार्य किया जाना प्रस्तावित है।

दुग्ध संकलन एवं गुणवत्ता वृद्धि के साथ-साथ दुग्ध समितियों के चयनित प्रशिक्षणार्थियों को मास्टर टेªनर के रूप में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड आणंद (गुजरात) भेजकर प्रशिक्षित किया गया है जिसमें 16 प्रशिक्षण बैचों में कुल 714 मास्टर टेªनर प्रशिक्षित किये गये है जिसमें 90 महिलायें भी प्रशिक्षित की गई है।

                प्रशिक्षण कार्य एक सतत् प्रक्रिया है जिसमें नित नवीन खोज व आविष्कारों को समाहित करते हुए कार्यो को सफलतापूर्वक संपन्न करने का प्रशिक्षण दिया जाता है अतः दुग्ध समिति के कर्मचारी, दुग्ध महासंघ के कर्मचारी व अधिकारियों का कार्य प्रशिक्षण हेतु भेजे जाने की कार्यवाही का अनुमोदन भी आप सबसे चाहता हूं।

पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एन.जी.ओ. के माध्यम से महासमुंद जिले में गोवर्धन सेवा एवं एकीकृत पशुधन विकास केन्द्रो का संचालन किया जा रहा है जिससे पशुओ को उत्तम व समय पर चिकित्सा सुविधा के साथ-साथ नस्ल सुधार कार्य में भी अच्छे परिणाम मिल रहे है भविष्य में इस सुविधा का अन्य क्षेत्रो में विस्तार किये जाने का प्रयास किया जावेगा।

                हरा-चारा उत्पादन हेतु नेपियर रोपणी के संबंध में एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है जिसे सभी क्षेत्रो में दुग्ध उत्पादक किसान भाईयो का अच्छा प्रतिसाद मिला है। इससे जहां पशु आहार पर किये जा रहे व्यय में कमी होगी, वही पशुओ को भी आवश्यक मात्रा में प्रोटीन की पूर्ति हो सकेगी।

दुग्ध महासंघ द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के माध्यम से 2435 विद्युत चालित चेफकटर 75 प्रतिशत अनुदान में दुग्ध समितियों के हितग्राहियों को उपलब्ध कराया गया है एवं 300 दुग्ध समितियों में पशु उपचार कटघरा (ट्रेविस) निःशुल्क स्थापित कराया गया है।

                दुग्ध विपणन के क्षेत्र में दुग्ध महासंघ को अन्य ब्राण्डों के दूध से व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है  अन्य प्रदेशो से भिन्न-भिन्न ब्राण्डों का दूध सस्ती दर पर उपलब्ध है एवं अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने के लिए दुग्ध महासंघ की टीम पूरी भावना से काम कर रही है।

                दुग्ध महासंघ का ब्राण्ड ‘‘देवभोग’’ अब किसी परिचय का मोहताज नही है, विभिन्न दुग्ध एवं दूध उत्पादो के विक्रय हेतु यह विश्वसनीय नाम साबित हो रहा है। देवभोग ब्राण्ड नाम से तरल दूध, घी, खोवा, पेड़ा, श्रीखण्ड, लस्सी, सादी दही व मीठा दही तथा फ्लेवर्ड मिल्क ताजा व गुणवत्ता युक्त होने के कारण लगातार बाजार में अपनी पैठ बना रही है, हमने अभी तक 40 खाद्य सामग्री का पंजीयन करा लिया है।

                अच्छे कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक माह हमने सबसे अच्छी क्वालिटी का सर्वाधिक दूध प्रदाय करने वाली दुग्ध समितियों को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है जो निम्नानुसार है-

  1. सर्वश्रेष्ठ गुणवत्तायुक्त दुग्ध समिति को रू. 3000.00
  2. सर्वश्रेष्ठ गुणवत्तायुक्त दुग्ध उत्पादक कृषक को रू. 2000.00
  3. सर्वश्रेष्ठ गुणवत्तायुक्त दुग्ध वाली दुग्ध समिति सचिव को रू. 2000.00
  4. सर्वश्रेष्ठ गुणवत्तायुक्त दुग्ध समितियों के मार्ग पर्यवेक्षक को रू. 3000.00

                मुझे पूरा विश्वास है कि आप का सहयोग व मार्गदर्शन हमें निरंतर प्राप्त होता रहेगा एवं हम सब मिलकर अपने दुग्ध महासंघ को नई उंचाईयांे पर पहुंचायेगें।

धन्यवाद

जय हिन्द

जय छत्तीसगढ़

जय जोहार

जय सहकार

(रसिक परमार)
अध्यक्ष
     छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्या.

About Devbhog

Chhattisgarh is one of the most progressive states of Republic of India. In the domain of dairy development it is well known for its productive milch cattle.

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